24 जून 2009

मायने बदल गए

परिवर्तन ही ‘स्थायी’ है
समझता है आदमी
तभी तो बदल लेता है,
खुद को समय के साथ
अपना पूरा किरदार
और बदल डालता है साथ में
सोच, फितरत, स्वभाव सबकुछ।
बदलावों के इस बवंडर में,
फंस कर बदल जाते हैं
लफ्जों के मायने भी
शब्द वही रहते हैं
शब्दकोश वही रहते हैं
बदल जाते हैं तो बस
लफ्जों के मायने

लड़ना बुराई से
देना सच का साथ
कहलाता था साहस कभी
पर बदल गए हैं पूरी तरह
साहस के मायने आज
चोर को चोर कहना
दलाल को दलाल कहना
और कहना दोगले को दोगला
‘साहस’ से भी बढ़कर
आज हो चला है ‘पराक्रम’
और यह भी सच है समाज का
कि हर आदमी हो नहीं सकता पराक्रमी
इस लिए उसने खोज निकाला है रास्ता
रास्ता ‘शालीनता’ की चादर ओढ़
बन जाने का ‘सुसभ्य’ और ‘लोकतांत्रिक’
- - -तो अब सभ्य, शालीन और लोकतांत्रिक
आदमी के मुंह से लिकलेंगे भला कैसे
दोगला, चोर, दलाल जैसे सस्ते शब्द
इस लिए गढ़ लिया गया है
एक ‘सुसभ्य’ सा नया संबोधन
चोर-दलाल-दोगले सबको
समेट लिया है बस एक लफ्ज में
क्या है बोलो वह शब्द !
ठीक कहा, ‘माननीय’ ।

6 टिप्‍पणियां:

  1. bahut hi satik wayani kawita ke maadhyam se kari ......kabile tarif hai......

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  2. सही कहा आपने,
    आज तो मायने बदल ही गया है,
    सही कटाक्ष किया ,
    धन्यवाद

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  3. बहुत सुन्दर रचना है।बधाई।
    बहुत सही कहा है--

    बदलावों के इस बवंडर में,
    फंस कर बदल जाते हैं
    लफ्जों के मायने भी
    शब्द वही रहते हैं
    शब्दकोश वही रहते हैं
    बदल जाते हैं तो बस
    लफ्जों के मायने

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  4. बडी गहरी बात और बडे सलीके से कही है आपने.

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