12 अप्रैल 2015

फ्रेंच अखबार 'ल मॉन्द' ने दिखा दिया मोदी महाशय को ठेंगा

देश के सरकारी न्यूज चैनल और रेडियो पर अपनी वाह-वाही का प्रसारण कराने वाले मोदी महाशय को फ्रांस के एक अखबार ने सीधे-सीधे ठेंगा दिखा दिया है। फ्रेंच अखबार 'ल मॉन्द' ने पेरिस में मोदी की जो किरकिरी की है उसकी ऊंचाई भीएफिल टावर से कतई कम नहीं कही जा सकती। 

दरअसल सातवें आसमान पर चल रहे सत्ता के अहंकार और पालतू संपादकों को उंगलियों के इशारे पर नचाने की आदत में मोदी जी ने फ्रांस में भी कुछ ऐसा ही करने की कोशिश कर डाली। ... बस जनाब, यहीं मात खा गया इंडिया। मोदी जी ने फ्रांस के अग्रणी अखबार 'ल मॉन्द' में अपना प्री फेब्रिकेटेड और प्लांटेड इंटरव्यू छपवाने की इच्छा जाहिर की, तो खरी-खरी सुननी पड़ गई देसी तीस मार खान को। 

दरअसल मोदी जी शायद भूल गए कि फ्रांस उनकी टेरिटरी नहीं है, जहां वह दूरदर्शन को मोदी दर्शन बना लेंगें और आकाशवाणी पर वक्त बे वक्त मोदी के ‘मन की बात’ बात बजेगी। मोदी जी को शायद यह भी याद नहीं रहा कि फ्रांस में भारत की तरह उनके कोई पद्म भूषण शर्मा जी नहीं बैठे हुए हैं, जो प्लांटेड इंटरव्यू चलाने और फर्जी अदालत लगाने में महारत रखते हों। सो अखबार ने न केवल मोदी जी का ऐसा इंटरव्यू छापने से इनकार ‌कर दिया बल्कि उसके सोशल साइट पर इसका नगाड़ा पीट कर मोदी जी की दुनिया भर में खूब भद्द भी पिटवाई। 

'ल मॉन्द' के दक्षिण एशियाई संवाददाता जूलियॉं बुविशॉ ने ट्विटर पर इस बात का खुलासा भी कर दिया। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा है कि 'हमें बताया गया था कि नरेंद्र मोदी सवालों के जवाब लिखकर देंगे, न कि सामने बैठकर। इसलिए 'ल मॉन्द' ने इंटरव्यू से इनकार कर दिया।' इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने दूसरे अखबार 'ल फिगार' से इस इंटरव्यू के लिए बात की।

इस तरह 'ल मॉन्द' ने एक तीर से दो नहीं, तीन शिकार कर दिखाए। उसने न सिर्फ मीडिया को मुट्ठी में समझने के मोद के गुरूर को उजागर किया, बल्कि पूर्वनियोजित या फिक्स इंटरव्यू छापने से इनकार करके अपनी साख को जनता के बीच और मजबूत कर लिया। इसके साथ ही उसने प्रतिद्वंद्वी अखबार 'ल फिगार' में छपे मोदी के इंटरव्यू की हकीकत भी दुनिया के सामने रख दी। दरअसल 'ल फिगार' 'ल मॉन्द' का प्रतिद्वंद्वी अखबार होने के साथ ही उस कंपनी दसौ का अखबार है, जो भारत को 126 रफेल लड़ाकू विमान बेचने की कोशिश कर रही है।

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